प्रोस्टेट ग्रंथि केवल पुरुषों में पाई जाती है। यह अखरोट के आकार की एक छोटी ग्रंथि होती है जो वीर्य बनाने में मदद करती है। उम्र बढ़ने के साथ प्रोस्टेट से जुड़ी समस्याएं होना सामान्य है, लेकिन इनमें से सबसे गंभीर प्रोस्टेट कैंसर है।

अक्सर शुरुआती चरणों में इसके कोई लक्षण दिखाई नहीं देते, इसलिए इसके संकेतों को समझना और समय पर जांच कराना बहुत ज़रूरी है।

1. पेशाब से जुड़ी समस्याएं

चूंकि प्रोस्टेट ग्रंथि मूत्रमार्ग (Urethra) के पास स्थित होती है, इसलिए इसमें ट्यूमर होने पर पेशाब की प्रक्रिया प्रभावित होती है। इसके मुख्य लक्षण हैं:

• बार-बार पेशाब आना: खासकर रात के समय बार-बार उठना।

• पेशाब शुरू करने में कठिनाई: पेशाब करने के लिए ज़ोर लगाना पड़ना।

• कमज़ोर धार: पेशाब की धार का पतला होना या रुक-रुक कर आना।

• पेशाब के बाद भी ऐसा महसूस होना: जैसे मूत्राशय (Bladder) पूरी तरह खाली नहीं हुआ है।

2. पेशाब या वीर्य में रक्त

यदि आपको पेशाब करते समय या स्खलन (Ejaculation) के दौरान खून दिखाई दे, तो इसे कभी भी नज़रअंदाज़ न करें। यह संक्रमण का संकेत भी हो सकता है, लेकिन प्रोस्टेट कैंसर की संभावना की जांच कराना आवश्यक है।

3. यौन स्वास्थ्य में बदलाव

प्रोस्टेट कैंसर के कुछ मामलों में यौन क्रिया प्रभावित हो सकती है, जैसे:

• इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (स्तंभन दोष) की अचानक शुरुआत।

• स्खलन के दौरान दर्द महसूस होना।

4. हड्डियों में दर्द (एडवांस्ड स्टेज के लक्षण)

जब प्रोस्टेट कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों में फैलने लगता है, तो यह अक्सर हड्डियों (विशेषकर कूल्हे, रीढ़ और पसलियों) को प्रभावित करता है। इसके लक्षणों में शामिल हैं:

• पीठ के निचले हिस्से, कूल्हों या जांघों में लगातार दर्द।

• हड्डियों में अकड़न या सुन्नपन महसूस होना।

• बिना किसी कारण के वजन कम होना।

कब कराएं डॉक्टर से संपर्क?

जरूरी नहीं कि ऊपर दिए गए सभी लक्षण कैंसर ही हों। अक्सर ये लक्षण BPH (Benign Prostatic Hyperplasia) यानी प्रोस्टेट के सामान्य रूप से बढ़ने के कारण भी हो सकते हैं। हालांकि, यदि आपकी उम्र 50 वर्ष से अधिक है और आप इनमें से कोई भी लक्षण महसूस कर रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।

विशेष नोट: अगर आपके परिवार में प्रोस्टेट कैंसर का इतिहास रहा है, तो आपको 45 की उम्र के बाद नियमित स्क्रीनिंग (PSA Test) करानी चाहिए।

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